Episodios
-
ज़िन्दगी को रोक देने की ज़िद में कोरोना लगा हुआ है, मगर ज़िन्दगी है कि उसे मुँह चिढ़ाकर, फिर से पटरी पर लौट आने की उम्मीद लिए बैठी है। आइए, सुनते हैं, कैसे लौटेगी ज़िन्दगी की रफ्तार।
-
¿Faltan episodios?
ज़िन्दगानी की ये कविता हमें रूबरू करवाती है, ज़िन्दगी के वापस रफ्तार में लौटने की उम्मीद से। सुनिए, मेरी लिखी ये कविता।
ज़िन्दगी को रोक देने की ज़िद में कोरोना लगा हुआ है, मगर ज़िन्दगी है कि उसे मुँह चिढ़ाकर, फिर से पटरी पर लौट आने की उम्मीद लिए बैठी है। आइए, सुनते हैं, कैसे लौटेगी ज़िन्दगी की रफ्तार।
¿Faltan episodios?