Episodit
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खुद को मजबूत और स्वराज्य को आगे बढ़ाने के लिए शिवाजी महाराज ने जयसिंह के साथ पुरंदर की संधि की बात मान ली और उनकी शर्तों को स्वीकार कर लिया। जिसके बाद औरंगज़ेब के कहने पर जयसिंह ने शिवाजी को उन्हें उनके पुत्र के साथ आगरा जाने का आग्रह भी किया,किन्तु शिवाजी ने आगरा जाना अस्वीकार कर दिया। जिसके बाद औरंगजेब ने शिवाजी को मानाने के लिए शाही कपड़े, तोहफे और 1 लाख रूपये भी भिजवाए। तो आखिर इस पत्र का शिवाजी पर क्या प्रभाव पड़ेगा। क्या शिवाजी औरंगज़ेब से मिलने जायेगे या नहीं और आखिर क्यों शिवाजी सभी शर्तों को मान गए थे आखिर क्या चल रहा था दोनों के दिमाग में । ये सब हम जानेगे हमारे अगले एपिसोड में।
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मर्दुभाषी औरंगज़ेब की बातों से प्रभावित होकर शिवाजी आगरा आ तो गए, किन्तु दरबार में शिवाजी के साथ जो हुआ उससे वह बिना इजाज़त के मुग़ल दरबार से बाहर चले गए। रामसिंह शिवाजी को दोबारा दरबार में ला पाने में नाकाम हो गए थे। इससे औरंगज़ेब तमतमा उठा था। दरबार के चारो और सन्नाटा था। तभी मुगल दरबार में एक ज़ोरदार हसी गुजने लगी। आखिर वो कौन था। जिसने इस शांति को भांग किया था। क्या वो शिवाजी थे या कोई और। इसके साथ साथ ये भी जानना दिलचस्प होगा कि औरंगज़ेब अपनी ना फ़रमानी का बदला शिवाजी से कैसे लेगा। क्योंकि शिवाजी अब औरंगज़ेब की गिरफ्त में ही थे। आगे क्या होगा ये कहानी कौन सा मोड़ लेगी जानेगे हम अगले एपिसोड में।
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Puuttuva jakso?
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अपना बदला लेने के लिए औरंगज़ेब ने शिवाजी को नज़रबंद कर लिया। जिससे निकलने के लिए शिवाजी ने एक योजना बनाई और अपने सहायक हीरोजी की सहायत से किले के बाहर निकल गए किन्तु उनके स्थान पर हीरोजी जिन्हे महल से बाहर आना था। आखिर कैसे हीरोजी इतने सख्त पहरे से निकल पाएंगे या फिर पकड़े जायेगे ? और अगर पकड़े गए तो क्या वह औरंगज़ेब के सामने इतने कमज़ोर हो जायेगे कि शिवाजी की योजना के बारे में बता देंगे। जानना बहुत दिलचस्प होगा कि आखिर क्या होगा इस स्वराज्य यात्रा में, यह जानेगे हम अगले एपिसोड में।
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शिवाजी और हीरोजी औरंगज़ेब के चंगुल से निकल कर रायगढ़ पहुंच गए थे। जहाँ शिवाजी ने पुनः उन किलो को जीतने की योजना जो मुगलो ने छीन लिए थे। उनकी योजना में और माँ साहेब के स्वप्न में सबसे पहला किला था कोंढाणा, जिसे जीत कर पहले अपना स्वाभिमान हासिल करना था। कित्नु कोंढाणा जीतने के लिए सिर्फ एक योद्धा की जरुरत थी। आखिर वो कौन योद्धा था, कौन इनता बलशाली था, जो कोंढाणा को मराठो के अधिकार में शामिल कर देगा। शिवाजी की आगे की योजना और उस वीर महायोध्या जो स्वराज्य के इस सफर में शिवाजी का दाहिना हाथ बनेगा। इन सबके बारे में हम जानेगे अपने अगले एपिसोड में।
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स्वराज्य की कल्पना एवं मुगलो पर अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए शिवाजी ने राज्याभिषेक की बात अपने प्रियजनों से कही, किन्तु कुछ उनकी इस बात से नाखुश भी हुए।आखिर वो कौन लोग थे जो शिवाजी महाराज के आसपास रहते हुए उनसे ईर्ष्या, द्वेष की भावना रखते थे। सभी लोगो के साथ प्रेम भावना और अपने पैन का व्यवहार करने के बाबजूद शिवाजी से कौन नफरत कर सकता था। आखिर उन लोगो के होने या न होने से शिवाजी के राज्याभिषेक में क्या परेशानियां आने वाली थी और आखिर क्यों। इस सबका जवाब मिलेगा हमे हमारे अगले एपिसोड में।
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शाइस्ता खान की शिकस्त और सूरत पर छापे ने औरंगज़ेब को दोहरी चोट दे गया था। औरंगज़ेब अब पागल हाथी की तरह शिवाजी को मरने के बारे में सोचने लगा। अब तक उसने जो भी षड्यंत्र शिवाजी के ख़िलाफ़ रचा था। उसमे उसे मुँह की खानी पड़ी थी। इस बार ऐसी कोई भी गलती न करते हुए औरंगज़ेब ने शिवाजी के ख़िलाफ़ फिर षड़यंत्र रचने लगा। आख़िर क्या था वो षड़यंत्र जानेगे इस एपिसोड में।
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शाइस्ता खान द्वारा इस छति की पूर्ति और इस तबाही का बदला लेने के लिए शिवाजी ने मुगलों के क्षेत्रों में जाकर उनकी सम्पति पर छापा मार कर उसे अपने कब्जे में लेने लगे। शिवाजी औरंगजेब को सबक सीखना चाहते थे। वह बदला लेना चाहते थे बेगुनाहो की हत्या का, तो आख़िर कैसे शिवाजी ने बदला लिया इन सबका, जानेगे हम इस एपिसोड में।
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शत्रु की विशाल सेना के सामने मुट्ठी भर सैनिकों को लेकर शिवाजी ने लालमहल पर डेरा जमाये मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के मामा शाइस्ता खा पर एकाएक आक्रमण कर दिया और लालमहल पर अपने कब्जे में ले लिया। शिवाजी महाराज ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर स्वराज के साम्राज्य को बुलंदी तक पहुंचाया. लेकिन अब जो मुसीबत उनके सामने थी उससे कैसे लड़ेंगे वीर शिवाजी ये हम जानेगे इस एपिसोड में।
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स्वतंत्रता के अनन्य पुजारी शिवाजी महाराज ने समस्त किलो को जीत कर उन पर केसरिया झंडा फैरा दिया था.. जिससे परेशान होकर आदिल शाह ने उन्हें रोकने के लिए बर्बरता और क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थी। और उनके पिता को क़ैद कर लिया था। यह परिस्थितिया शिवाजी जी के लिए बहुत दुविधा जनक थी। वह उस दो राहे पर आकर खड़े हो गए थे। जहां एक तरफ स्वराज्य था और दूसरी तरफ उनके पिता। तो आखिर क्या चुना शिवाजी महाराज ने यह हम जानेगे इस एपिसोड में।
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भारत एक ऐसा देश है। जहाँ समय-समय पर विदेशी आक्रांताओ ने उसे अपने अधीन किया। विदेशी आक्रांताओ के शिकंजे से भारतमाता को निकलने के लिए भारत माँ के कई महान वीर सपूतों ने अपनी जान की बाज़ी तक लगा दी। उन्हीं महान वीर सपूतो में छत्रपति शिवाजी भी थे। जिन्होंने बचपन से ही माता जीजाबाई से सीख लिया था कि उन्हें भारत देश को गुलामी से आज़ाद करना है जिसके लिए उन्होंने स्वराज्य की स्थापना अपने बाल अवस्था में ही कर दी थी। जिसके बाद शिवाजी ने अपने बचपन में ही कई ऐसे कदम उठाये , जिससे उन्हें स्वराज्य यात्रा में मदद मिलती रही। आख़िर ऐसे कौन से कदम शिवाजी ने उठाये और किन लोगो की मदद ली इस यात्रा में ? ये हम जानेगे इस एपिसोड में।