Folgen
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हम सबके बीच, कहीं ना कहीं, कभी रोड पर, तो कभी सिग्नल पर, कभी सब्जी के ढेले पर तो कभी कपड़ा मारते होटल पर। उसी छोटू की कहानी, मेरी जुबानी।
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Fehlende Folgen?
Hello all, I am Shubha Jain.
I am here to share my poems and story. I hope you all like it or if not please give me your feedback.
Thank you
हम सबके बीच, कहीं ना कहीं, कभी रोड पर, तो कभी सिग्नल पर, कभी सब्जी के ढेले पर तो कभी कपड़ा मारते होटल पर। उसी छोटू की कहानी, मेरी जुबानी।
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